Yogi Adityanath: संन्यासी से CM तक, जानिए योगी आदित्यनाथ का पूरा राजनीतिक सफर, 2026

Yogi adiyanath

आज हम ऐसे व्यक्ति के बारे में चर्चा करेंगे जिसको किसे पहचान की आवश्यकता नहीं है योगी आदित्यनाथ (मूल नाम: अजय सिंह बिष्ट; जन्म 5 जून 1972) Yogi Adiyanath गोरखपुर में एक हिंदू मठ, गोरखनाथ मठ के महंत (मुख्य पुजारी) भी हैं, एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं उनकी छवि एक हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादी और एक सामाजिक रूढ़िवादी की है।

प्रारंभिक जीवन Yogi Adiyanath

एनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश का विभाजन) के गढ़वाली जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर नमक गांव के एक गढ़वाली राजपूत परिवार में Yogi Adiyanath का जन्म हुआ। इनके पिता का नाम आनंद सिंह बेस्ट है जो एक फॉरेस्ट रेंजर थे और मां का नाम सोनिया देवी है। 20 अप्रैल 2020 को उनके पिता आनंद सिंह बिस्कुट की मृत्यु हो गई। अपने माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़े भाई और एक बड़े भाई के बाद ये बुजुर्ग थे और दो छोटे भाई हैं। 1977 में अर्थशास्त्र के गाजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की गई और 1987 में यहां से अर्थशास्त्र की परीक्षा पास की गई। सन् 1989 में ऋषभ के श्री भरत मंदिर इंट्रेस्ट कॉलेज से ऋषभ पंत की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई इस अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने की। 1992 में श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की परीक्षा पास की। कोटद्वार में रहने के दौरान एक कमरे से सामान चोरी हो गया था जिसमें तीन सनत प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से विज्ञान कंपनी बनाने का प्रयास जारी रखा गया। इसके बाद रिद्धिजीव में पुनः स्थापित विद्यापीठ में प्रवेश लिया गया लेकिन राम मंदिर आंदोलन के प्रभाव और प्रवेश को लेकर संकट से उनका ध्यान अन्य ओर से टूट गया। 1993 में गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने के लिए ये गोरखपुर आए और अपने चाचा महंत अवैद्यनाथ के शरण में ही चले गए और दीक्षा ले गए। 1994 में ये पूर्ण संत बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया। 12 सितंबर 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद यहां का महंत बनाया गया था। 2 दिन बाद नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया।

गोरखनाथ मठ से जुड़ाव Yogi Adiyanath

राम मंदिर आंदोलन के बारे में जानने के बाद ये अपने आप छोड़ कर गोरखपुर आ गए Yogi Adiyanath के जीवन में गोरखनाथ मठ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। वे महंत अवैद्यनाथ के शिष्य बने और बाद में उनके उत्तराधिकारी के रूप में सामने आए। इसी से इनके जीवन में अनेक बदलाव आए
महंत अवैद्यनाथ गोरखपुर के प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व थे। उन्होंने लंबे समय तक गोरखनाथ पीठ का नेतृत्व किया और राजनीति में भी सक्रिय रहे।
योगी आदित्यनाथ ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। धार्मिक नेतृत्व के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी अपनी भूमिका बढ़ाई।
गोरखनाथ मठ पूर्वी उत्तर प्रदेश में केवल धार्मिक केंद्र नहीं रहा है। इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी लंबे समय से रहा है। Yogi Adiyanathके नेतृत्व में यह प्रभाव और अधिक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। हिंदुओं को नेता के रूप में जाना जाने लगा, ये अपने भाषण और काम से अलग पहचान बनाई

राजनैतिक जीवन

सबसे पहले 1998 में Yogi Adiyanath गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत गए। तब इनकी उम्र केवल 26 वर्ष थी। वे बारहवीं लोक सभा (1998-99) के सबसे युवा सांसद थे। 1999 में ये गोरखपुर से पुनः सांसद चुने गए। अप्रैल 2002 में इन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी। 2004 में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता। 2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इन्हें एक हेलीकॉप्टर भी दिया गया। उनकी राजनीति की शैली शुरुआत से ही स्पष्ट और मुखर मानी गई। वे हिंदुत्व, राष्ट्रवाद, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे। इसी कारण समर्थकों के बीच उनकी पहचान एक स्पष्टवादी और मजबूत नेता की बनी, जबकि आलोचक उनके कुछ बयानों और राजनीतिक रुख पर सवाल भी उठाते रहे हैं। 19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री पद सौंपा गया।

2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने Yogi Adiyanath

2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण चुनाव था। भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा में भारी बहुमत हासिल किया। भारतीय जनता पार्टी ने 403 सीटों पर विधानसभा में 312 सीटें जीतीं और सहयोगियों के साथ उनकी संख्या और बढ़ी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने मार्च 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सीएम के रेस में उनका नाम नहीं था ऐसा कहा जाता है आरएसएस टीम के सहयोग से इन्हें सीएम बनाया जाता है।
Yogi Adiyanath का मुख्यमंत्री बनना कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के संभावित बदलावों में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे।
लेकिन पार्टी नेतृत्व ने अंततः Yogi Adiyanath को उत्तर प्रदेश की कमान दी। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा परिवर्तन था।
गोरखपुर के सांसद और धार्मिक नेता से वे देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री बन गए।

विवाद ?

विवाद 7 सितम्बर 2008 को Yogi Adiyanath पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में वे बाल-बाल बचे। यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से भी ज्यादा भक्तों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहूलुहान कर दिया। आदित्यनाथ को गोरखपुर दंगों के दौरान तब गिरफ्तार किया गया जब मुस्लिम त्योहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिंदू युवा की जान चली गई। नवाज ने बताया कि वह बुरी तरह दोषी है। तब अधिकारियों ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया लेकिन Yogi Adiyanath उस जगह पर जाने को अड़ गए। तब उन्होंने शहर में लगे कर्फ्यू को हटाने की मांग की। अगले दिन उन्होंने शहर के मध्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की लेकिन नवाज ने इसकी अनुमति देने से मना कर दिया। आदित्यनाथ ने भी इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ्तारी दी। आदित्यनाथ को CRPC की धारा 151A, 146, 147, 279, 506 के तहत जेल भेज दिया गया। उनपर कार्रवाई का असर हुआ कि मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे फंक दिए गए, जिसका आरोप उनके संगठन हिंदू युवा वाहिनी पर लगा। यह दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छह जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गए। उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन मुजफ्फरपुर हरि ओम और पुलिस प्रमुख राजा श्रीवास्तव का तबादला हो गया। कथित रूप से आदित्यनाथ के ही दबाव के कारण मुलायम सिंह यादव की उत्तर प्रदेश सरकार को यह कार्रवाई करनी पड़ी। योगी धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के लिए काफी चर्चा में रहे। 2005 में Yogi Adiyanathने कथित तौर पर 1800 ईसाइयों का शुद्धीकरण कर हिंदू धर्म में शामिल किया। ईसाइयों के इस शुद्धीकरण का काम उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किया गया था।

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